सम्मेलन के स्तम्भ

hindi-sahitya-sammelan-allahabad २५ दिसम्बर १८६१ को प्रयाग के अहियापुर मोहल्ले में जन्में पंडित मदनमोहन मालवीय हिन्दी साहित्य सम्मेलन के संस्थापक अध्यक्ष थे | ...और पढ़ें१० अक्टूबर, १९१० को काशी में संपन्न प्रथम अधिवेशन का सभापतित्व आदरणीय मालवीय जी ने किया | मुंबई में संपन्न सम्मेलन के नौवें अधिवेशन का , सन १९१९ में मालवीय जी ने पुन: सभापतित्व किया |

hindi-sahitya-sammelan-allahabad१ अगस्त १८८२ को प्रयाग में जन्में भारत रतन राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन सम्मेलन के जन्मकाल से ही इससे जुड़े रहे I प्रथम अधिवेशन काशी में संपन्न होने के अवसर पर ही टंडन जी ने द्वितीय अधिवेशन (सम्मेलन) प्रयाग में करने का निमंत्रण दिया, ...और पढ़ें जिसे स्वीकार कर लिया गया और सम्मेलन का अस्थायी कार्यालय प्रयाग में स्थापित किया गया और टंडन जी को ही इसकी व्यवस्था सौंपी गयी I इसी अधिवेशन की व्यवस्था के लिए टंडन जी को प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया I टंडन जी सन १९१० से सन १९२० तक सम्मेलन के प्रधानमंत्री रहे तथा सन १९२३ में सम्मेलन के सभापति निर्वाचित हुए I टंडन जी ने हिन्दी और सम्मेलन दोनों के विकास के लिए अथक प्रयास किया और इसी लिए उन्हें 'सम्मेलन के प्राण ' कहा जाता है |

hindi-sahitya-sammelan-allahabad२ अक्टूबर, १८६९ को पोरबंदर (गुजरात) में जन्मे विश्ववन्द्य मोहन दास करमचंद गाँधी सन १९१८ में सम्मेलन के सभापति चुने गए और इस बार भी इंदौर में ही अधिवेशन की अध्यक्षता की | ...और पढ़ें गाँधी जी के १९१८ के आवाहन पर ही हिन्दी साहित्य सम्मेलन ने मद्रास में अपना प्रचार-कार्यालय खोला, जो आगे चलकर दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा के रूप में दक्षिण भारत के चार प्रान्तों में हिन्दी- प्रचार का कार्य अनवरत कर रहा है I गाँधी जी के ही आवाहन पर वर्धा में, दक्षिण के चार प्रान्तों को छोड़ शेष अहिंदीभाषी क्षेत्र में हिन्दी- प्रचार हेतु राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा की स्थापना सन १९३६ में हुई |

hindi-sahitya-sammelan-allahabad२७ मई, १९१७ को प्रयाग में जन्में डॉ० प्रभात शास्त्री राष्ट्रभाषा के प्रति समर्पित संस्कृतज्ञ थे I वे सन १९७५ से सन १९९९ तक सम्मेलन के प्रधानमंत्री थे I इस कालावधि में उनहोंने सम्मेलन का चतुर्दिक विकास किया I और इसी लिए उन्हें 'सम्मेलन के उन्नायक ' नाम से अभिहित किया जाता है |

दो शब्द

hindi-sahitya-sammelan-allahabad सम्मलेन का यह संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत करते हुए मुझे प्रसन्नता हो रही ह | हिंदी साहित्य सम्मलेन अपने जीवन का सौ वर्ष पूर्ण कर दूसरे शतक में प्रवेश कर रहा है | मुझे प्रसन्नता इसलिए भी है की सम्मलेन की गौरवशाली परम्परा का आज हिंदी-संसार मुल्यांकन करने लगा है और उसके हिंदी भाषा और साहित्य के विकास में योगदान को विषय बनाकर सम्मेलन पर इलाहाबाद , लखनऊ, कानपुर, आदि विश्वविद्यालयों में एम् ० फिल ० एवं पी--एच० डी० की शोधोपाधी के लिए भी कार्य हुए है I प्रसिद्ध साहित्यकार श्री नरेश मेहता द्वारा लिखित सम्मेलन के इतिहास का एक खंड हम प्रकाशित कर चुके हैं और डा० गंगासागर तिवारी द्वारा लिखित हिन्दी साहित्य- सम्मेलन का इतिहास भाग-२ शीघ्र प्रकाश्य है|


विभूति मिश्र
प्रधानमंत्री हि० सा० स० इला०

सम्मेलन की इमारतें

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         ६५ अधिवेशन

शांति निकेतन, १६, १७ एवं १८ मार्च २०१३

hindi-sahitya-sammelan-allahabadदो शब्द

hindi-sahitya-sammelan-allahabadसम्मेलन के स्तम्भ

hindi-sahitya-sammelan-allahabadस्थापना

hindi-sahitya-sammelan-allahabadउद्देश्य

hindi-sahitya-sammelan-allahabadसंघटन

hindi-sahitya-sammelan-allahabad सम्मेलन का प्रकाशन


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